ज्योतिष-और-रोग/ Astrology and Diseases


पृथ्वी लोक जिसे शास्त्रों में मृत्यु लोक भी कहतें हैं इस मृत्यु लोक में देवता भी जन्म लेने के लिए लालयित रहते केवल यही लोक कर्मों का फल देता है इसलिए जब मानव इस लोक में जन्म लेता हैं तो उसे यह स्वीकार करने में कोई भी झिझक नहीं होनी चहिये की वह अपने पिछले जन्मों का फल भुगतने के लिए यंहा आया है चाहे वह कर्म अच्छे हो या फिर बुरे, किसी भी व्यक्ति की जन्मपत्रिका उसके पूर्वजन्मों का का मानचित्र होता है जिसे कोई भी विद्धवान आचार्य बहुत ही सरलता से उसके रोगों की विवेचना कर सकता है वैसे तो मनुष्य जीवन कष्टों का पिटारा है, मगर शरीर ही रोगी हो जाए, तो उससे बडा कष्ट कोई नहीं हो सकता। अर्थात जीवन का रोग महाकष्ट है। इससे मुक्त होने के लिए ओषधि लेना ही महत्वपूर्ण नहीं है बल्कि इसके मूल में ज्योतिष भी एक महत्वपूर्ण साधन है। ज्योतिषी केवल रोग के मूल कारण को ही नहीं पकडता अपितु इसकी प्रकृति, रोग स्थान का पूर्व में ही पता लगा लेता है, क्योंकि हर व्यक्ति का जीवन प्रकृति के विभिन्न कारकों और तत्वों से प्रभावित रहता है, और उनमें उसके जन्म के साथ जुडे ग्रह-नक्षत्र महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं। हम यहां बता रहे हैं कि आपके जन्म के समय के लग्न की आपके जीवन में कितनी महत्ता है- जब हम किसी जन्मपत्रिका का निरूपण करते हैं तो कुछ कमियों को अनदेखा कर देते हैं।

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