सेहत का साधन से गहरा रिश्ता है। साधन का अभाव हो तो घर में बहस और तनाव की स्थिति पैदा होती है, जिससे अंतत: सेहत ही प्रभावित होती है। इसलिए अपने आय के स्नोत को दुरुस्त रखना जरूरी है। तो फिर क्यों न अपने आय के स्नोत यानी अपने कार्यस्थल के वास्तुदोष को दूर किया जाए, ताकि अच्छी आमदनी हो और सब कुछ ठीक रहे।
व्यावसायिक स्थल वास्तुशास्त्र के अनुसार नहीं है तो उसे ठीक कराएं। अगर सुधार संभव न हो तो ऐसे स्थल को त्याग देने में ही भलाई है। बहुमंजिली इमारतों के निर्माण में अधिकांश वास्तु-सिद्धांतों का अनुसरण करना मुश्किल होता है, फिर भी यदि निर्माण वास्तु सम्मत किया जाता है तो न सिर्फ भू-स्वामी को ऐसी इमारत से अधिकाधिक अर्थ लाभ होता है, बल्कि इमारत में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित करने वाले उद्योगपतियों को भी पूरा लाभ होता है।
1:1 और 1:2 के आकार के आयताकार भूखंड व्यावसायिक प्रयोजन के लिए सर्वोचित रहते हैं। ऐसे भूखंड पर व्यावसायिक उद्देश्य से किया गया निर्माण कार्य न सिर्फ भू-स्वामी को लाभ देता है, बल्कि उक्त इमारत में बिजनेस संचालित करने वाले व्यवसायियों को भी लाभान्वित करता है। http://www.astroswami.in
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